आइए पढ़ते हैं : केदारनाथ सिंह की कविताएँ
विशेष (24 नवंबर 2017), मुखपृष्ठ संपादकीय परिवार

विद्रोह और समन्वय के कवि कुँवर नारायण
अरुण कुमार त्रिपाठी

कुँवर नारायण मूलतः विद्रोह और समन्वय के कवि हैं और यही मानव की मूल दार्शनिक प्रवृत्ति है। इसी भाव में व्यक्ति और उसका संसार चलता है और इसी भाव में एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी से टकराती है और इसी दार्शनिक भाव के बीच एक व्यवस्था से दूसरी व्यवस्था निकलती है। इसी द्वंद्व के बीच एक सत और असत का निर्धारण होता है और उसी से सच के कई अँधेरे पहलुओं से परदा उठता है और उसके नए रूप प्रकट होते हैं। कुँवर नारायण का जाना स्वाधीनता संग्राम की उस पीढ़ी का जाना है जिसने इस देश को सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं दार्शनिक स्तर पर ढूँढ़ने का प्रयास किया था और बीसवीं सदी के सर्वाधिक चेतनाशील दौर में अपने सपने को आकार दिया था।

विचित्र संयोग की बात है कि कुँवर नारायण का जन्म 1927 में उस समय हुआ जब देश अंग्रेजों से मुक्ति का आंदोलन लड़ रहा था और जब वे गए तो देश की बुद्धि और चेतना को कुंठित करने और उसे किसी नेता की डिब्बी में, तो किसी संगठन के ध्वज में, चंद नारों में या कानून की किसी दफाओं में कैद करने का प्रयास चल रहा है। इसी दमघोटू दौर को लक्षित करते हुए वे 'अयोध्या' में राम को सलाह देते हैं कि हे राम तुम लौट जाओ वापस क्योंकि यह तुम्हारा त्रेता युग नहीं यह नेता युग है। यहाँ अयोध्या को ही लंका बना दिया गया है।

अगर कुँवर जी की जीवन यात्रा अयोध्या से दिल्ली के बीच सिमटी हुई है तो उनकी काव्ययात्रा आत्मजयी और बाजश्रवा के बहाने के बीच। यही दो काव्य कुँवर जी के सृजन के मूल में हैं यही हमारी चेतना के भी। यह हमारी राजनीति की यात्रा का भी प्रतीक है और हमारे समाज की सांस्कृतिक यात्रा का भी। भारतीय परंपरा और दर्शन पर केंद्रित इस काव्य में कठोपनिषद की कथा में पिरोए गए दार्शनिक संवाद के माध्यम से हम आज के समय से टकराते हैं और सृष्टि-बोध, शांति-बोध, सौंदर्य-बोध और मुक्ति-बोध ढूँढ़ने की कोशिश करते हैं। यही युवा पीढ़ी का उद्देश्य है जो अधिकार जमाने वाली पिछली पीढ़ी से टकरा कर नए समाज की रचना करती है।

इसीलिए आत्मजयी काव्य में नचिकेता कहता है -

असहमति को अवसर दो। सहिष्णुता को आचरण दो
कि बुद्धि सिर ऊँचा रख सके...
उसे हताश मत करो
उपेक्षा से खिन्न न हो जाए कहीं
मनुष्य की साहसिकता
अमूल्य थाती है यह सबकी
इसे स्वर्ग के लालच में छीन लेने का

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कैनवास पर प्रेम
(उपन्‍यास)
विमलेश त्रिपाठी

"कैनवास पर प्रेम", एक चित्रकार सत्यदेव शर्मा के जीवन के कैनवास पर चढ़ते, उतरते प्रेम, जुदाई और समर्पण के विविध रंगों की कहानी है। एक उजाड़ बियाबान जिंदगी जीते सत्यदेव पर नजर पड़ती है विमल बाबू की जो बकलम खुद एक चिरकुट लेखक हैं और उनके अंदर का कथाकार, उनकी पत्नी के तमाम प्रतिरोधों पर हावी होकर उनको सत्यदेव की कहानियाँ टुकड़ों में सुनने पर विवश सा कर देता है। ...लेखक ने जानबूझ कर बहुत सफाई से उपन्यास की भाषा के प्रवाह को उन जगहों पर एक अलग धारा में मोड़ा है जहाँ से एक सीधी सपाट प्रेम कथा को एक नई लय मिल सके। "कैनवास पर प्रेम" में शिल्प के प्रयोग हैं, कहानी कहने का कौशल है, उतार चढ़ाव है पर कहानी तो वही है जिसे हम आप कई उपन्यासों में पढ़ चुके हैं, कई कहानियों में सुन चुके हैं। अगर किसी पेंटिंग से तुलना करें तो कह सकते हैं की "कैनवास पर प्रेम" एक सुंदर कोलाज सरीखी रचना है। पर इस कोलाज को बनाते समय चित्रकार ने कैनवास पर चढ़े कागज को ढंग से नहीं परखा। एक मटमैले बैकग्राउंड पर बना एक सुंदर रंगीला कोलाज। - वैभव मणि त्रिपाठी

कहानियाँ
अमिताभ शंकर राय चौधरी
बाजी
आदाब
सफेद चादर
तोहार नाम की छै?
ममता शर्मा
उम्मीद की कहानी
एक शाम न जाने किस के नाम
मेफ्लाइ सी जिंदगी

यात्रा संस्मरण
श्रीप्रकाश शुक्ल
कुलधरा के खंडहरों में

आलोचना
आनंद पांडेय
मैनेजर पांडेय का उपन्यास-विमर्श

पत्रकारिता
कृपाशंकर चौबे
हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता के 150 वर्ष

कुछ और कहानियाँ
राकेश बिहारी
परिधि के पार
और अन्ना सो रही थी...
बाकी बातें फिर कभी
किनारे से दूर...
आउटसाइडर

कविताएँ
प्रभात रंजन

संरक्षक
प्रो. गिरीश्‍वर मिश्र
(कुलपति)

 संपादक
प्रो. आनंद वर्धन शर्मा
फोन - 07152 - 252148
ई-मेल : pvctomgahv@gmail.com

समन्वयक
अमित कुमार विश्वास
फोन - 09970244359
ई-मेल : amitbishwas2004@gmail.com

संपादकीय सहयोगी
मनोज कुमार पांडेय
फोन - 08275409685
ई-मेल : chanduksaath@gmail.com

तकनीकी सहायक
रविंद्र वानखडे
फोन - 09422905727
ई-मेल : rswankhade2006@gmail.com

कार्यालय सहयोगी
उमेश कुमार सिंह
फोन - 09527062898
ई-मेल : umeshvillage@gmail.com

विशेष तकनीकी सहयोग
अंजनी कुमार राय
फोन - 09420681919
ई-मेल : anjani.ray@gmail.com

गिरीश चंद्र पांडेय
फोन - 09422905758
ई-मेल : gcpandey@gmail.com

आवश्यक सूचना

हिंदीसमयडॉटकॉम पूरी तरह से अव्यावसायिक अकादमिक उपक्रम है। हमारा एकमात्र उद्देश्य दुनिया भर में फैले व्यापक हिंदी पाठक समुदाय तक हिंदी की श्रेष्ठ रचनाओं की पहुँच आसानी से संभव बनाना है। इसमें शामिल रचनाओं के संदर्भ में रचनाकार या/और प्रकाशक से अनुमति अवश्य ली जाती है। हम आभारी हैं कि हमें रचनाकारों का भरपूर सहयोग मिला है। वे अपनी रचनाओं को ‘हिंदी समय’ पर उपलब्ध कराने के संदर्भ में सहर्ष अपनी अनुमति हमें देते रहे हैं। किसी कारणवश रचनाकार के मना करने की स्थिति में हम उसकी रचनाओं को ‘हिंदी समय’ के पटल से हटा देते हैं।
ISSN 2394-6687

हमें लिखें

अपनी सम्मति और सुझाव देने तथा नई सामग्री की नियमित सूचना पाने के लिए कृपया इस पते पर मेल करें :
mgahv@hindisamay.in