hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

अति सूधो सनेह को मारग है
घनानंद


अति सूधो सनेह को मारग है, जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं।
तहाँ साँचे चलैं तजि आपनपौ झिझकैं कपटी जे निसाँक नहीं।
घनआनंद प्यारे सुजान सुनौ यहाँ एक ते दूसरो आँक नहीं।
तुम कौन धौं पाटी पढ़े हौ लला, मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं।।


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में घनानंद की रचनाएँ