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साहित्य संस्कृति विमर्श |
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प्रेमचन्द
का कथा साहित्य
यथार्थ की
ठोस भूमि पर आधारित है,
जो तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक,
आर्थिक और धार्मिक परिवेश में रचित होने के बावजूद काल और
परिवेशबध्द नहीं,
अपितु काल और परिवेश का अतिक्रमण कर सर्वकालिक बन गया है।
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