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महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की प्रस्तुति
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कामायनी - जयशंकर प्रसाद चिंता - भाग 1 / चिंता - भाग 2 / आशा - भाग 1 / आशा - भाग 2 / श्रद्धा - भाग 1 / श्रद्धा - भाग 2 / काम - भाग 1 / काम - भाग 2/ वासना - भाग 1 / वासना - भाग 2 / लज्जा - भाग 1 / लज्जा - भाग 2 / कर्म - भाग 1 / कर्म - भाग 2 / ईर्ष्या - भाग 1 / ईर्ष्या - भाग 2 / इड़ा - भाग 1 / इड़ा - भाग 2 / स्वप्न - भाग 1 / स्वप्न - भाग 2 / संघर्ष - भाग 1 / संघर्ष - भाग 2 / निर्वेद - भाग 1 / निर्वेद - भाग 2 / दर्शन - भाग 1 / दर्शन - भाग 2 / रहस्य - भाग 1 / रहस्य - भाग 2 / आनंद - भाग 1 / आनंद - भाग 2 वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
कामायनी - जयशंकर प्रसाद
/ स्वप्न - भाग 1 / स्वप्न - भाग 2 / संघर्ष - भाग 1 / संघर्ष - भाग 2 / निर्वेद - भाग 1 / निर्वेद - भाग 2 / दर्शन - भाग 1 / दर्शन - भाग 2 / रहस्य - भाग 1 / रहस्य - भाग 2 / आनंद - भाग 1 / आनंद - भाग 2 वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
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स्वप्न - भाग 1 / स्वप्न - भाग 2 / संघर्ष - भाग 1 / संघर्ष - भाग 2 / निर्वेद - भाग 1 / निर्वेद - भाग 2 / दर्शन - भाग 1 / दर्शन - भाग 2 / रहस्य - भाग 1 / रहस्य - भाग 2 / आनंद - भाग 1 / आनंद - भाग 2 वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
स्वप्न - भाग 1
/ स्वप्न - भाग 2 / संघर्ष - भाग 1 / संघर्ष - भाग 2 / निर्वेद - भाग 1 / निर्वेद - भाग 2 / दर्शन - भाग 1 / दर्शन - भाग 2 / रहस्य - भाग 1 / रहस्य - भाग 2 / आनंद - भाग 1 / आनंद - भाग 2 वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
स्वप्न - भाग 2 / संघर्ष - भाग 1 / संघर्ष - भाग 2 / निर्वेद - भाग 1 / निर्वेद - भाग 2 / दर्शन - भाग 1 / दर्शन - भाग 2 / रहस्य - भाग 1 / रहस्य - भाग 2 / आनंद - भाग 1 / आनंद - भाग 2 वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
स्वप्न - भाग 2 / संघर्ष - भाग 1 / संघर्ष - भाग 2 / निर्वेद - भाग 1 / निर्वेद - भाग 2 / दर्शन - भाग 1 / दर्शन - भाग 2 / रहस्य - भाग 1 / रहस्य - भाग 2 / आनंद - भाग 1
/ आनंद - भाग 2 वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
आनंद - भाग 2 वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
आनंद - भाग 2
वैदेही-वनवास - हरिऔध आखर अरथ- दिनेश कुमार शुक्ल
कुरुक्षेत्र - रामधारी सिंह दिनकर भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य रचनाएं मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन (कविता) राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)
आकस्मिक मुलाकात -विस्साव शिम्बोर्स्का (पोलिश) आग की भीख - रामधारी सिंह दिनकर आज मानव का सुनहला प्रात है - भगवतीचरण वर्मा आज तुम मेरे लिए हो - हरिवंश राय बच्चन आज शाम है बहुत उदास - भगवतीचरण वर्मा आराम से भाई ज़िन्दगी - भवानीप्रसाद मिश्र आर्य-मैथिलीशरण गुप्त आह ! वेदना मिली विदाई - जयशंकर प्रसाद इस शहर में - रेनर मरिया रिल्के
इस शहर में - रेनर मरिया रिल्के
उत्तर - महादेवी वर्मा एक बूँद - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ऐ इन्सानों -गजानन माधव मुक्तिबोध अँधेरे का दीपक - हरिवंश राय बच्चन आँख का आँसू - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' क से ड. क्योंकि सपना है अभी भी - धर्मवीर भारती कल सहसा यह सन्देश मिला - भगवतीचरण वर्मा कर्मवीर - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' कहते हैं, तारे गाते हैं - हरिवंश राय बच्चन कितना अच्छा होता है - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना किसको नमन करूँ मैं भारत?-रामधारी सिंह दिनकर किसने बचाया मेरी आत्मा को -आलोक धन्वा
कुछ प्रेम कविताएँ - उदयन वाजपेयी कुछ कविताएँ - मनीषा कुलश्रेष्ठ कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें - भगवतीचरण वर्मा कोई अधूरा पूरा नहीं होता - विनोद कुमार शुक्ल कौन तुम मेरे हृदय में - महादेवी वर्मा खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी-सुभद्रा कुमारी चौहान गोली दागो पोस्टर - आलोक धन्वा च से ञ चार कौए उर्फ चार हौए -भवानीप्रसाद मिश्र चाँदनी जी लो - अज्ञेय चीड़ों का विस्तार- पाब्लो नेरूदा (स्पानी) चुम्बन - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' चौक- आलोक धन्वा जलियाँवाला बाग में बसंत -सुभद्रा कुमारी चौहान जाहिल मेरे बाने -भवानीप्रसाद मिश्र ज़िलाधीश - आलोक धन्वा जो तुम आ जाते - महादेवी वर्मा जो बीत गई - हरिवंश राय बच्चन ट से ण त से न ताकि तुम मुझे सुन सको -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) तुम अपनी हो, जग अपना है - भगवतीचरण वर्मा तुम तूफान समझ पाओगे ? - हरिवंश राय बच्चन तुम मुझे क्षमा करो - राजकमल चौधरी तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या- महादेवी वर्मा तुम मृगनयनी - भगवतीचरण वर्मा तुम सुधि बन-बनकर बार-बार - भगवतीचरण वर्मा तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार -शिवमंगल सिंह सुमन तेरी सुधि बिन क्षण क्षण सूना - महादेवी वर्मा दिन जल्दी-जल्दी ढलता है - हरिवंश राय बच्चन देखिये न मेरी कारगुज़ारी - अज्ञेय देखो-सोचो-समझो - भगवतीचरण वर्मा दरिंदा -भवानीप्रसाद मिश्र नदियाँ - आलोक धन्वा नया कवि : आत्म-स्वीकार - अज्ञेय नव वर्ष - हरिवंश राय बच्चन नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त नहुष का पतन-मैथिलीशरण गुप्त नाश देवता -गजानन माधव मुक्तिबोध निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल - भारतेंदु हरिश्चंद्र निर्माण - हरिवंश राय बच्चन निराशावादी -रामधारी सिंह दिनकर निष्ठा - रेनर मरिया रिल्के प से म पतझड़ की शाम - हरिवंश राय बच्चन पतझड़ के पीले पत्तों ने - भगवतीचरण वर्मा पतंग - आलोक धन्वा पर्वत-सी पीर -दुष्यन्त कुमार परिचय-रामधारी सिंह दिनकर प्रेम- रेनर मरिया रिल्के प्रकाश ढाँपता है तुम्हें - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) प्रतीक्षा - हरिवंश राय बच्चन प्राप्ति - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' फसल - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना फूल और काँटा - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' बोधिसत्व की ग्यारह कविताएँ बस इतना अब चलना होगा - भगवतीचरण वर्मा बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं -दुष्यन्त कुमार बेदर्द -भवानीप्रसाद मिश्र ब्रूनो की बेटियाँ- आलोक धन्वा भागी हुई लड़कियाँ- आलोक धन्वा मैं कब से ढूँढ़ रहा हूँ - भगवतीचरण वर्मा मैं प्रिय पहचानी नहीं - महादेवी वर्मा मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ-शिवमंगल सिंह सुमन मैंने आहुति बन कर देखा - अज्ञेय मृत्यु और कवि -गजानन माधव मुक्तिबोध य र ल व श याद करता हूँ तुम्हें -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) रेल- आलोक धन्वा रोटी और स्वाधीनता -रामधारी सिंह दिनकर लीक पर वे चलें - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना व्यथा की रात - महादेवी वर्मा ष स ह शापित कमलों का आत्म-मंथन - कन्हैया लाल नन्दन सृजन का दर्द - कन्हैया लाल नन्दन सब संख्यक - विनोद कुमार शुक्ल स्त्री देह -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सफ़ेद रात- आलोक धन्वा सब कुछ कह लेने के बाद - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना सत्य तो बहुत मिले - अज्ञेय सवेरे उठा तो धूप खिली थी - अज्ञेय साजन आए, सावन आया - हरिवंश राय बच्चन सुबह है भरपूर - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सुर्ख़ हथेलियाँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना संकोच-भार को सह न सका - भगवतीचरण वर्मा संवेदना - हरिवंश राय बच्चन हम पंछी उन्मुक्त गगन के-शिवमंगल सिंह सुमन हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..- हरिवंश राय बच्चन हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती- जयशंकर प्रसाद क्ष त्र ज्ञ
कुछ प्रेम कविताएँ -
उदयन वाजपेयी कुछ कविताएँ - मनीषा कुलश्रेष्ठ कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें - भगवतीचरण वर्मा कोई अधूरा पूरा नहीं होता - विनोद कुमार शुक्ल कौन तुम मेरे हृदय में - महादेवी वर्मा खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी-सुभद्रा कुमारी चौहान गोली दागो पोस्टर - आलोक धन्वा च से ञ चार कौए उर्फ चार हौए -भवानीप्रसाद मिश्र चाँदनी जी लो - अज्ञेय चीड़ों का विस्तार- पाब्लो नेरूदा (स्पानी) चुम्बन - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' चौक- आलोक धन्वा जलियाँवाला बाग में बसंत -सुभद्रा कुमारी चौहान जाहिल मेरे बाने -भवानीप्रसाद मिश्र ज़िलाधीश - आलोक धन्वा जो तुम आ जाते - महादेवी वर्मा जो बीत गई - हरिवंश राय बच्चन ट से ण त से न ताकि तुम मुझे सुन सको -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) तुम अपनी हो, जग अपना है - भगवतीचरण वर्मा तुम तूफान समझ पाओगे ? - हरिवंश राय बच्चन तुम मुझे क्षमा करो - राजकमल चौधरी तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या- महादेवी वर्मा तुम मृगनयनी - भगवतीचरण वर्मा तुम सुधि बन-बनकर बार-बार - भगवतीचरण वर्मा तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार -शिवमंगल सिंह सुमन तेरी सुधि बिन क्षण क्षण सूना - महादेवी वर्मा दिन जल्दी-जल्दी ढलता है - हरिवंश राय बच्चन देखिये न मेरी कारगुज़ारी - अज्ञेय देखो-सोचो-समझो - भगवतीचरण वर्मा दरिंदा -भवानीप्रसाद मिश्र नदियाँ - आलोक धन्वा नया कवि : आत्म-स्वीकार - अज्ञेय नव वर्ष - हरिवंश राय बच्चन नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त नहुष का पतन-मैथिलीशरण गुप्त नाश देवता -गजानन माधव मुक्तिबोध निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल - भारतेंदु हरिश्चंद्र निर्माण - हरिवंश राय बच्चन निराशावादी -रामधारी सिंह दिनकर निष्ठा - रेनर मरिया रिल्के प से म पतझड़ की शाम - हरिवंश राय बच्चन पतझड़ के पीले पत्तों ने - भगवतीचरण वर्मा पतंग - आलोक धन्वा पर्वत-सी पीर -दुष्यन्त कुमार परिचय-रामधारी सिंह दिनकर प्रेम- रेनर मरिया रिल्के प्रकाश ढाँपता है तुम्हें - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) प्रतीक्षा - हरिवंश राय बच्चन प्राप्ति - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' फसल - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना फूल और काँटा - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' बोधिसत्व की ग्यारह कविताएँ बस इतना अब चलना होगा - भगवतीचरण वर्मा बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं -दुष्यन्त कुमार बेदर्द -भवानीप्रसाद मिश्र ब्रूनो की बेटियाँ- आलोक धन्वा भागी हुई लड़कियाँ- आलोक धन्वा मैं कब से ढूँढ़ रहा हूँ - भगवतीचरण वर्मा मैं प्रिय पहचानी नहीं - महादेवी वर्मा मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ-शिवमंगल सिंह सुमन मैंने आहुति बन कर देखा - अज्ञेय मृत्यु और कवि -गजानन माधव मुक्तिबोध य र ल व श याद करता हूँ तुम्हें -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) रेल- आलोक धन्वा रोटी और स्वाधीनता -रामधारी सिंह दिनकर लीक पर वे चलें - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना व्यथा की रात - महादेवी वर्मा ष स ह शापित कमलों का आत्म-मंथन - कन्हैया लाल नन्दन सृजन का दर्द - कन्हैया लाल नन्दन सब संख्यक - विनोद कुमार शुक्ल स्त्री देह -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सफ़ेद रात- आलोक धन्वा सब कुछ कह लेने के बाद - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना सत्य तो बहुत मिले - अज्ञेय सवेरे उठा तो धूप खिली थी - अज्ञेय साजन आए, सावन आया - हरिवंश राय बच्चन सुबह है भरपूर - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सुर्ख़ हथेलियाँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना संकोच-भार को सह न सका - भगवतीचरण वर्मा संवेदना - हरिवंश राय बच्चन हम पंछी उन्मुक्त गगन के-शिवमंगल सिंह सुमन हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..- हरिवंश राय बच्चन हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती- जयशंकर प्रसाद क्ष त्र ज्ञ
उदयन वाजपेयी कुछ कविताएँ - मनीषा कुलश्रेष्ठ
कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें - भगवतीचरण वर्मा कोई अधूरा पूरा नहीं होता - विनोद कुमार शुक्ल कौन तुम मेरे हृदय में - महादेवी वर्मा खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी-सुभद्रा कुमारी चौहान गोली दागो पोस्टर - आलोक धन्वा च से ञ चार कौए उर्फ चार हौए -भवानीप्रसाद मिश्र चाँदनी जी लो - अज्ञेय चीड़ों का विस्तार- पाब्लो नेरूदा (स्पानी) चुम्बन - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' चौक- आलोक धन्वा जलियाँवाला बाग में बसंत -सुभद्रा कुमारी चौहान जाहिल मेरे बाने -भवानीप्रसाद मिश्र ज़िलाधीश - आलोक धन्वा जो तुम आ जाते - महादेवी वर्मा जो बीत गई - हरिवंश राय बच्चन ट से ण त से न ताकि तुम मुझे सुन सको -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) तुम अपनी हो, जग अपना है - भगवतीचरण वर्मा तुम तूफान समझ पाओगे ? - हरिवंश राय बच्चन तुम मुझे क्षमा करो - राजकमल चौधरी तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या- महादेवी वर्मा तुम मृगनयनी - भगवतीचरण वर्मा तुम सुधि बन-बनकर बार-बार - भगवतीचरण वर्मा तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार -शिवमंगल सिंह सुमन तेरी सुधि बिन क्षण क्षण सूना - महादेवी वर्मा दिन जल्दी-जल्दी ढलता है - हरिवंश राय बच्चन देखिये न मेरी कारगुज़ारी - अज्ञेय देखो-सोचो-समझो - भगवतीचरण वर्मा दरिंदा -भवानीप्रसाद मिश्र नदियाँ - आलोक धन्वा नया कवि : आत्म-स्वीकार - अज्ञेय नव वर्ष - हरिवंश राय बच्चन नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त नहुष का पतन-मैथिलीशरण गुप्त नाश देवता -गजानन माधव मुक्तिबोध निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल - भारतेंदु हरिश्चंद्र निर्माण - हरिवंश राय बच्चन निराशावादी -रामधारी सिंह दिनकर निष्ठा - रेनर मरिया रिल्के प से म पतझड़ की शाम - हरिवंश राय बच्चन पतझड़ के पीले पत्तों ने - भगवतीचरण वर्मा पतंग - आलोक धन्वा पर्वत-सी पीर -दुष्यन्त कुमार परिचय-रामधारी सिंह दिनकर प्रेम- रेनर मरिया रिल्के प्रकाश ढाँपता है तुम्हें - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) प्रतीक्षा - हरिवंश राय बच्चन प्राप्ति - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' फसल - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना फूल और काँटा - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' बोधिसत्व की ग्यारह कविताएँ बस इतना अब चलना होगा - भगवतीचरण वर्मा बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं -दुष्यन्त कुमार बेदर्द -भवानीप्रसाद मिश्र ब्रूनो की बेटियाँ- आलोक धन्वा भागी हुई लड़कियाँ- आलोक धन्वा मैं कब से ढूँढ़ रहा हूँ - भगवतीचरण वर्मा मैं प्रिय पहचानी नहीं - महादेवी वर्मा मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ-शिवमंगल सिंह सुमन मैंने आहुति बन कर देखा - अज्ञेय मृत्यु और कवि -गजानन माधव मुक्तिबोध य र ल व श याद करता हूँ तुम्हें -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) रेल- आलोक धन्वा रोटी और स्वाधीनता -रामधारी सिंह दिनकर लीक पर वे चलें - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना व्यथा की रात - महादेवी वर्मा ष स ह शापित कमलों का आत्म-मंथन - कन्हैया लाल नन्दन सृजन का दर्द - कन्हैया लाल नन्दन सब संख्यक - विनोद कुमार शुक्ल स्त्री देह -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सफ़ेद रात- आलोक धन्वा सब कुछ कह लेने के बाद - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना सत्य तो बहुत मिले - अज्ञेय सवेरे उठा तो धूप खिली थी - अज्ञेय साजन आए, सावन आया - हरिवंश राय बच्चन सुबह है भरपूर - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सुर्ख़ हथेलियाँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना संकोच-भार को सह न सका - भगवतीचरण वर्मा संवेदना - हरिवंश राय बच्चन हम पंछी उन्मुक्त गगन के-शिवमंगल सिंह सुमन हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..- हरिवंश राय बच्चन हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती- जयशंकर प्रसाद क्ष त्र ज्ञ
कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें - भगवतीचरण वर्मा कोई अधूरा पूरा नहीं होता - विनोद कुमार शुक्ल कौन तुम मेरे हृदय में - महादेवी वर्मा खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी-सुभद्रा कुमारी चौहान गोली दागो पोस्टर - आलोक धन्वा
च से ञ चार कौए उर्फ चार हौए -भवानीप्रसाद मिश्र चाँदनी जी लो - अज्ञेय चीड़ों का विस्तार- पाब्लो नेरूदा (स्पानी) चुम्बन - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' चौक- आलोक धन्वा जलियाँवाला बाग में बसंत -सुभद्रा कुमारी चौहान जाहिल मेरे बाने -भवानीप्रसाद मिश्र ज़िलाधीश - आलोक धन्वा जो तुम आ जाते - महादेवी वर्मा जो बीत गई - हरिवंश राय बच्चन ट से ण
त से न ताकि तुम मुझे सुन सको -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) तुम अपनी हो, जग अपना है - भगवतीचरण वर्मा तुम तूफान समझ पाओगे ? - हरिवंश राय बच्चन तुम मुझे क्षमा करो - राजकमल चौधरी तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या- महादेवी वर्मा तुम मृगनयनी - भगवतीचरण वर्मा तुम सुधि बन-बनकर बार-बार - भगवतीचरण वर्मा तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार -शिवमंगल सिंह सुमन तेरी सुधि बिन क्षण क्षण सूना - महादेवी वर्मा दिन जल्दी-जल्दी ढलता है - हरिवंश राय बच्चन देखिये न मेरी कारगुज़ारी - अज्ञेय देखो-सोचो-समझो - भगवतीचरण वर्मा दरिंदा -भवानीप्रसाद मिश्र नदियाँ - आलोक धन्वा नया कवि : आत्म-स्वीकार - अज्ञेय नव वर्ष - हरिवंश राय बच्चन नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त नहुष का पतन-मैथिलीशरण गुप्त नाश देवता -गजानन माधव मुक्तिबोध निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल - भारतेंदु हरिश्चंद्र निर्माण - हरिवंश राय बच्चन निराशावादी -रामधारी सिंह दिनकर निष्ठा - रेनर मरिया रिल्के
प से म पतझड़ की शाम - हरिवंश राय बच्चन पतझड़ के पीले पत्तों ने - भगवतीचरण वर्मा पतंग - आलोक धन्वा पर्वत-सी पीर -दुष्यन्त कुमार परिचय-रामधारी सिंह दिनकर प्रेम- रेनर मरिया रिल्के प्रकाश ढाँपता है तुम्हें - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) प्रतीक्षा - हरिवंश राय बच्चन प्राप्ति - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' फसल - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना फूल और काँटा - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' बोधिसत्व की ग्यारह कविताएँ बस इतना अब चलना होगा - भगवतीचरण वर्मा बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं -दुष्यन्त कुमार बेदर्द -भवानीप्रसाद मिश्र ब्रूनो की बेटियाँ- आलोक धन्वा भागी हुई लड़कियाँ- आलोक धन्वा मैं कब से ढूँढ़ रहा हूँ - भगवतीचरण वर्मा मैं प्रिय पहचानी नहीं - महादेवी वर्मा मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ-शिवमंगल सिंह सुमन मैंने आहुति बन कर देखा - अज्ञेय मृत्यु और कवि -गजानन माधव मुक्तिबोध
य र ल व श याद करता हूँ तुम्हें -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) रेल- आलोक धन्वा रोटी और स्वाधीनता -रामधारी सिंह दिनकर लीक पर वे चलें - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना व्यथा की रात - महादेवी वर्मा ष स ह शापित कमलों का आत्म-मंथन - कन्हैया लाल नन्दन सृजन का दर्द - कन्हैया लाल नन्दन सब संख्यक - विनोद कुमार शुक्ल स्त्री देह -पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सफ़ेद रात- आलोक धन्वा सब कुछ कह लेने के बाद - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना सत्य तो बहुत मिले - अज्ञेय सवेरे उठा तो धूप खिली थी - अज्ञेय साजन आए, सावन आया - हरिवंश राय बच्चन सुबह है भरपूर - पाब्लो नेरूदा (स्पानी) सुर्ख़ हथेलियाँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना संकोच-भार को सह न सका - भगवतीचरण वर्मा संवेदना - हरिवंश राय बच्चन हम पंछी उन्मुक्त गगन के-शिवमंगल सिंह सुमन हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..- हरिवंश राय बच्चन हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती- जयशंकर प्रसाद क्ष त्र ज्ञ
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