साहित्य संस्कृति विमर्श

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काव्य पुस्तकें

कामायनी - जयशंकर प्रसाद  

चिंता - भाग 1 / चिंता - भाग 2 / आशा - भाग 1 / आशा - भाग 2 / श्रद्धा - भाग 1 / श्रद्धा - भाग 2 / काम - भाग 1 / काम - भाग 2/ वासना - भाग 1 /

वासना - भाग 2 / लज्जा - भाग 1 / लज्जा - भाग 2कर्म - भाग 1 / कर्म - भाग 2 / ईर्ष्या - भाग 1 / ईर्ष्या - भाग 2 / इड़ा - भाग 1 / इड़ा - भाग 2
/

स्वप्न - भाग 1
/ स्वप्न - भाग 2 / संघर्ष - भाग 1 /  संघर्ष - भाग 2 /  निर्वेद - भाग 1 / निर्वेद - भाग 2 / दर्शन - भाग 1 / दर्शन - भाग 2 /

रहस्य - भाग 1 / रहस्य - भाग 2 / आनंद - भाग 1  
/ आनंद - भाग 2
 

आखर अरथ-   दिनेश कुमार शुक्ल

( - पुस्तकें)

कुरुक्षेत्र -  रामधारी सिंह दिनकर 

मधुशाला - हरवंश राय बच्चन (कविता)

राम की शक्ति पूजा - निराला (कविता)

कविताएँ

से अ: -
अक्सर एक व्यथा - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
अजनबी देश है यह - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
अन्य काव्य रचनाएं - भारतेंदु हरिश्चंद्र
अपाहिज व्यथा -दुष्यन्त कुमार
अश्रु यह पानी नहीं है - महादेवी वर्मा
आग की भीख - रामधारी सिंह दिनकर
आज मानव का सुनहला प्रात:है - भगवतीचरण वर्मा
आज तुम मेरे लिए हो - हरिवंश राय बच्चन
आज शाम है बहुत उदास - भगवतीचरण वर्मा
आराम से भाई ज़िन्दगी - भवानीप्रसाद मिश्र
आर्य-मैथिलीशरण गुप्त
आह ! वेदना मिली विदाई - जयशंकर प्रसाद
उत्तर - महादेवी वर्मा
एक बूँद - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
ऐ इन्सानों -गजानन माधव मुक्तिबोध
अँधेरे का दीपक - हरिवंश राय बच्चन
आँख का आँसू - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

से ड.

क्योंकि सपना है अभी भी  - धर्मवीर भारती
कल सहसा यह सन्देश मिला - भगवतीचरण वर्मा
कर्मवीर - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
कहते हैं, तारे गाते हैं - हरिवंश राय बच्चन
कितना अच्छा होता है - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
किसको नमन करूँ मैं भारत?-रामधारी सिंह दिनकर
किसने बचाया मेरी आत्मा को -आलोक धन्वा
कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें - भगवतीचरण वर्मा
कौन तुम मेरे हृदय में - महादेवी वर्मा
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी-सुभद्रा कुमारी चौहान
गोली दागो पोस्टर - आलोक धन्वा
 


से ञ
चार कौए उर्फ चार हौए -भवानीप्रसाद मिश्र
चाँदनी जी लो - अज्ञेय
चीड़ों का विस्तार- पाब्लो नेरूदा
चुम्बन - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
चैक- आलोक धन्वा
जलियाँवाला बाग में बसंत -सुभद्रा कुमारी चौहान
जाहिल मेरे बाने -भवानीप्रसाद मिश्र
ज़िलाधीश   - आलोक धन्वा
जो तुम आ जाते - महादेवी वर्मा
जो बीत गई - हरिवंश राय बच्चन

 से ण

त से न
ताकि तुम मुझे सुन सको -पाब्लो नेरूदा
तुम अपनी हो, जग अपना है - भगवतीचरण वर्मा
तुम तूफान समझ पाओगे ? - हरिवंश राय बच्चन
तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या- महादेवी वर्मा
तुम मृगनयनी - भगवतीचरण वर्मा
तुम सुधि बन-बनकर बार-बार - भगवतीचरण वर्मा

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार -शिवमंगल सिंह सुमन
तेरी सुधि बिन क्षण क्षण सूना - महादेवी वर्मा

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है - हरिवंश राय बच्चन
देखिये न मेरी कारगुज़ारी - अज्ञेय
देखो-सोचो-समझो - भगवतीचरण वर्मा
दरिंदा -भवानीप्रसाद मिश्र
नदियाँ - आलोक धन्वा
नया कवि : आत्म-स्वीकार - अज्ञेय
नव वर्ष - हरिवंश राय बच्चन
नर हो न निराश करो मन को-मैथिलीशरण गुप्त
नहुष का पतन-मैथिलीशरण गुप्त

नाश देवता -गजानन माधव मुक्तिबोध
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल - भारतेंदु हरिश्चंद्र
निर्माण - हरिवंश राय बच्चन
निराशावादी -रामधारी सिंह दिनकर


से म
पतझड़ की शाम - हरिवंश राय बच्चन
पतझड़ के पीले पत्तों ने - भगवतीचरण वर्मा
पतंग - आलोक धन्वा
पर्वत-सी पीर -दुष्यन्त कुमार
परिचय-रामधारी सिंह दिनकर
प्रकाश ढाँपता है तुम्हें - पाब्लो नेरूदा
प्रतीक्षा - हरिवंश राय बच्चन
प्राप्ति - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
फसल - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
फूल और काँटा - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
बस इतना अब चलना होगा - भगवतीचरण वर्मा
बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं -दुष्यन्त कुमार
बेदर्द -भवानीप्रसाद मिश्र
ब्रूनो की बेटियाँ- आलोक धन्वा
भागी हुई लड़कियाँ- आलोक धन्वा

मैं कब से ढूँढ़ रहा हूँ - भगवतीचरण वर्मा
मैं प्रिय पहचानी नहीं - महादेवी वर्मा
मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ-शिवमंगल सिंह सुमन
मैंने आहुति बन कर देखा - अज्ञेय
मृत्यु और कवि -गजानन माधव मुक्तिबोध



ल व श
याद करता हूँ तुम्हें -पाब्लो नेरूदा
रेल- आलोक धन्वा
रोटी और स्वाधीनता -रामधारी सिंह दिनकर
लीक पर वे चलें - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
व्यथा की रात - महादेवी वर्मा

ष स
स्त्री देह -पाब्लो नेरूदा
सफ़ेद रात- आलोक धन्वा
सब कुछ कह लेने के बाद - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
सत्य तो बहुत मिले - अज्ञेय
सवेरे उठा तो धूप खिली थी - अज्ञेय
साजन आए, सावन आया - हरिवंश राय बच्चन
सुबह है भरपूर - पाब्लो नेरूदा
सुर्ख़ हथेलियाँ - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
संकोच-भार को सह न सका - भगवतीचरण वर्मा
संवेदना - हरिवंश राय बच्चन
हम पंछी उन्मुक्त गगन के-शिवमंगल सिंह सुमन
हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..- हरिवंश राय बच्चन
हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती- जयशंकर प्रसाद

क्ष त्र  ज्ञ

 

 

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