hindisamay head


अ+ अ-

कविता

अमर प्रेम का क्षण
विश्वनाथ प्रसाद तिवारी


कुछ भी नहीं था बाहर
सारा ब्रह्मांड सिमट आया था
शरीर में

कुछ भी नहीं था भीतर
सारी चेतना उड़ गई थी
अंतरिक्ष में

कौन-सा क्षण था वह
हमारे अमर प्रेम का
जिसका नहीं किया हमने
अनुभव।

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की रचनाएँ