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कविता

7. सात
त्रिन सूमेत्स

अनुवाद - राजलक्ष्मी


माता पिता ने शरीर दिया
आत्मा किसने दी
क्या क्या कर सकते हो आखिर
क्या सब निश्चित सुरक्षित होता है
जब रात गुजर रही हो
और किसी भी चाबी से दरवाजा न खुलता हो
जब घर 'घर' नहीं रह जाता
जब खुद के लिए कोई इलाज नही होता
न धरा न पानी न आग न हवा
और कोई तुम्हारी प्रतीक्षा भी न कर रहा हो
तब भी कुछ तो इलाज होता होगा


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