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महेश वर्मा
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हिंदी समय में महेश वर्मा की रचनाएँ
कविताएँ
अँधेरा
अनुपस्थित
अनुवाद
आग
आदिवासी औरत रोती है
इतिवृत्त
इस समय के किस्सागो को समझे जाने की ज़रूरत है
इसी के आलोक में
उतर गया है पानी में
उदास साँझ
उन दिनों - 1
उन दिनों - 2
एक जगह
एक दिन
और छायाएँ
कुछ नहीं
कुछ पड़ गया है आँख में
कमीज़
कुर्सी
कल के लिए
कविताएँ
किससे छूट गया
किस्सा
किस्सागो
किसी जगह
कीचड़
कोई आवाज़ होती
ख़ून
गिरने के बारे में एक नोट...
घर
चढ़ आया है पानी
चेतावनी
चंदिया स्टेशन की सुराहियाँ प्रसिद्ध हैं
चील
छींक
जीवन-कविता
झाड़ू
ढूँढ़ना-पाना
तुम्हारी बात
दूसरी ओर से
दीवारें
धूल की जगह
नेपथ्य
नहीं
पत्थर
पूर्वकथन
पूर्वज कवि
पुराना पेड़
पहला
पानी
पीठ
पोलिश कवि ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त के लिए छह कविताएँ
फिर लौटकर
बारिश
बाँह उखड़ जाने पर
बीज
भूल
भाषा
भाषा
भाषा लेकिन भूल गया था
मक्खियाँ
मेरे पास
मिट्टी तेल
मिलने गया था
रुका रहता है
रविवार
रहस्य
राख
रात
रात
लड़की और गुलाब के फूल
लाओ
वक्तव्य
वर्षाजल
शायद
सदी के बीच में
सेब
हमारे सुंदर दुख
हाथ
हिसाब
शीर्ष पर जाएँ
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